दो पल की है ये ज़िन्दगी!

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

फुट फुट कर मरना क्यों गूंजती हँसी सिख ले..

भिंक माँगने से भला कमर कस के काम करना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

किसी की मुस्कुराहट पे फिदा होना छोड आखों की सच्चाई पढना सिख ले..

निंद भला कैसे आएगी मन की शांति मिलाना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

शिकवा करने से किसका हुआ भला सबको जोङकर चलना सिख ले..

दो वक्त की रोटी नसिब है तुझे खुशहाल जीवन के गीत गाना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

समय का इंतजार ना कर वक्त को बदलना सिख ले..

दुनिया में बदलाव लाने की जिद छोड अपने स्वभाव में बदलाव लाना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

गुलाबो से भरी राह चलते हुए काटों का चुभना सिख ले..

दबाव में नहीं बनता घडा अपनी राहों को मोङ देना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

डुबता हुआ सुरज ही नई सुबह लाएगा हारने का गम पिना सिख ले..

उम्मीद का दिया जलाकर अपनी मंजिल पर पहुंचना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

संदेह ना रख कोई कदापि खुले आसमान मे उडान भरना सिख ले..

ईर्ष्या की ओर इशारा ना कर खुद को साबित करना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

किसी दिन रूख जाएगी सांसे दिल की धड़कन सुनना सिख ले..

कदम कदम पर है किस्मत लिखी मौत का खौफ भगाना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

कौशल्य

 

एक पाण्याचा थेंब होता,
गारवा ज्याच्या रक्तात होता..
काळाच्या भरात ओढावत होता,
समुद्रात खारट.. नदीत गोड..
तर हवेत वाफ होत होता..
गवतावर पळत होता,
तर कमळावर नाचत होता..
चेहऱ्याला पाणीदार सौंदर्य,
तर अग्निला थंडावा देवून जात होता..
स्वतःचे अस्तित्व शोधायचा
जणू त्याला आता नाद लागला होता..
दुसर्यांसाठी जगता जगता
स्वतःला भेटू पहात होता..

वाटेवर चालता चालता अचानक
भेटला त्याला शिंपला..
म्हणाला, वेड्यावाणी जगतो
एक रात्र माझ्यात सामावून रहा..
थेंब होता थकला,
शिंपल्यात जाऊन निजला..
पहाटे उघडता डोळे, बघतो काय!
पाहिले एक नवीन रुप
नव्याने जसा तो जन्माला होता..

शिंपला आता त्याला सांगत होता,
कान देवून थेंब जे ऐकत होता..
आता राहिला नाही फक्त थेंब तू,
झाला आहेस मौल्यवान मोती तू..
आस राहिल तुझी सर्वांना,
कळेल किंमत तुझी जगाला..
पण होतास तू  एक पाण्याचा थेंब
हे ठेव ध्यानात..
गारवा तुझा रक्तात असू दे..
चेहऱ्याला तसेच सौंदर्य देवून जा,
मानवी मनाला थंडावा देवून जा..
पाण्याचा थेंब आता समजला होता,
अस्तित्व शोधण्याचा प्रयत्न त्याचा
आता यशस्वी झाला होता..

​दो पल की तो है ये ज़िन्दगी जिना इसे सिख ले..

​दो पल की तो है ये ज़िन्दगी

जिना इसे सिख ले..

फुट फुट कर मरना क्यों 

गूंजती हँसी सिख ले.. 

भिंक माँगने से भला

कमर कस के काम करना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी

जिना इसे सिख ले..

किसी की मुस्कुराहट पे फिदा होना छोड

आखों की सच्चाई पढना सिख ले..

निंद भला कैसे आएगी

मन की शांति मिलाना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी

जिना इसे सिख ले..

शिकवा करने से किसका हुआ भला
सबको जोङकर चलना सिख ले..

दो वक्त की रोटी नसिब है तुझे

खुशहाल जीवन के गीत गाना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी

जिना इसे सिख ले..

समय का इंतजार ना कर

वक्त को बदलना सिख ले..

दुनिया में बदलाव लाने की जिद छोड

अपने स्वभाव में बदलाव लाना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी

जिना इसे सिख ले..

गुलाबो से भरी राह चलते हुए

काटों का चुभना सिख ले..

दबाव में नहीं बनता घडा

अपनी राहों को मोङ देना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी

जिना इसे सिख ले..

डुबता हुआ सुरज ही नई सुबह लाएगा

हारने का गम पिना सिख ले..

उम्मीद का दिया जलाकर

अपनी मंजिल पर पहुंचना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी

जिना इसे सिख ले..

संदेह ना रख कोई कदापि

खुले आसमान मे उडान भरना सिख ले..

ईर्ष्या की ओर इशारा ना कर

खुद को साबित करना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी

जिना इसे सिख ले..

किसी दिन रूख जाएगी सांसे

दिल की धड़कन सुनना सिख ले..

कदम कदम पर है किस्मत लिखी

मौत का खौफ भगाना सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी

जिना इसे सिख ले..

दो पल की तो है ये ज़िन्दगी

जिना इसे सिख ले..

Secret Admirers..

Insomnia caught me that night,

Offered to sell me off is every single light.

Anonymous were the moist dews,

Along with the silent screams of the battling leaves.

Way far I was to reach and listen them,

While I overheard- “THE GEMINI GEM”.

Breeze slithering bangs from my eyes,

Called bard within that lies.

I pictured here my peaceful sleep,

Rather in which I would be running deep.

Bright and white pinned some beams,

Not to seethe although it seems.

Dews assisted by moonlight,

Rose me up quite right.

Tryst called so was fascinating,

Termed goals were the topic illuminating.

Sururbs to us were full of tranquility,

And I was called to garner as vitality.

The girth was small, yet glacial,

Among all their gestures facial.

Curtains at window saw cold hamper,

Hastily covered me, to boast me pamper.

All those had so long integrated,

To have me soon interrogated.

Intermittent boosts were the theme,

I being client, they made this scheme.

A kindled voice- “Invincible are never the destinations”,

While other stern- “Do not make eyes as here were exclamations!”.

Mute were now my notifications,

Alongside window gave the justification.

Underneath kinetic energy started to increase,

This is a legacy seldom to decrease.

With merriment and powers in my fist,

Another mirage ended with a twist.

 

Blurred out..? Not for long…

The world front of my eyes has started to rotate..
round and round and round..
A couple of moments later, I could hardly
put forward my feet on the ground..
Suddenly everything blurred out
and my sight became dark..
The actions attempted by me,
promised my future to leave a mark..
A thing now
hurt me in the head..
Long after, I realized I had
fallen down on my bed..
Nor the cigar, neither the alcohol,
some minute drugs will cause me a brutal death, I thought..
The vein of my brain will potentially
rupture releasing the blood clot by clot..
That put me through a long
sequence of reel running forward..
All the moments revealed cynosure,
telling me “You’re not coward”..
All the brightest mystic landmarks stood,
faded one by one..
The present laughed at my toil,
made my fun..
Bloody nightmare came to me and
put me through reckless way..
My own Nebula too, now
lowered down it’s sway..
The nocturnal groans
reverberated in every sound..
For every move devoid of logic,
opened up and expanded the bound..
The substratum of my ethical power
broke down into fine pieces..
Governed before all the laws
and impulses, now ditches..
Oh no.. I won’t let that
happen so easy..
Nothing in the world could
make my life fussy..
The distress, hah! I will make it
the faggot, surely to burn..
Exactly, infinite lessons gory,
had, in a manner made me learn..
For every tear that has barren me until now,
I do have a much much better revenge to take..
Nevertheless, again all the blossomed smiles will
plunge into phenomenal foreshadow, but no longer fake..

Peace

pexels-photo-45683-large.jpegShe was glad that day.

He was always a reason

to keep her smiling,

But he was now becoming

all her happiness.

She now felt loved.

Things went just like she wanted

And she had him whom she forever wanted.

Secret in secret was in her mind now

She understood the game of life now.

She felt leading a proper path now.

The days were gone

Which were haunted,

For all the forest

She had now hunted.

She wanted to grow,

The infant in her now is matured, it show.

She felt the same way as

When she used to be in  the nature’s hug.

The pleasant moments she missed

In loneliness bug.

She wanted to feel each breathe now,

She wanted to live her life now.

She stood in front of herself,

She had eyes, calmly hypnotizing

She had a face, magically glowing

She had a smile, silently charming.

She was standing on cloud nine now.

She felt blessed.

She felt grateful towards Him.

She wished her life full of

Moments she would mention gratitude for.

She wanted to be His favorite child now.

She wanted to be his favorite girl now.